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कैसे होता है धान खरीद घोटाला, किसान नेता ने कर दिया बड़ा खुलासा

करनाल में करोड़ों के धान खरीद घोटाले की जांच हो रही तेज

Satyakhabarindia

 

सत्य खबर हरियाणा

Karnal Paddy Scam : करनाल में हुए धान खरीद घोटाले की जांच करते हुए एसआईटी ने पांच अधिकारियों को गिरफ्तार किया था। इस मामले की जांच लगातार जारी है और माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां भी हो सकती है। एसआईटी ने इस मामले में इससे पहले मिलरों से भी पूछताछ की थी। एक ओर जहां पुलिस अभी इस घोटाला को 10 करोड़ के आसपास का मन कर चल रही है वहीं सूत्र दावा करते हैं कि यह घोटाला 100 करोड़ रुपए से ज्यादा का है।

इस मामले में सभी पक्ष मानते हैं कि इस फर्जीवाड़े से सरकार को करोड़ों का नुकसान हुआ है। फर्जी बारे में राशि को लेकर सभी की अलग-अलग राय है। कहा जा रहा है कि यह घोटाला 10 करोड़ रुपए से लेकर 100 करोड रुपए से ज्यादा तक जा सकता है। सूत्रों की मानें तो करनाल मंडी में करीब 5 लाख क्विंटल धान के फर्जी पर्चे काटे गए। यदि इस मात्रा को सरकारी रेट 2389 रुपये से गुणा किया जाए, तो करोड़ों का घोटाला सामने आता है।

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भाकियू के प्रदेश अध्यक्ष रतन मान ने मंडियों में चले फर्जीवाड़े के खेल का पूरा भंडाफोड़ किया है। उनके अनुसार इस पूरे गिरोह में आढ़ती, किसान, मार्केटिंग बोर्ड के कर्मचारी और मंडी के अधिकारी शामिल होते हैं। रतन मान के अनुसार, कृषि विभाग ने प्रति एकड़ 35 क्विंटल का पोर्टल बना रखा है, जबकि असली उत्पादन 17 से 19 क्विंटल प्रति एकड़ ही है। ऐसे में पोर्टल पर बची हुई 16-17 क्विंटल की जगह को फर्जी धान दिखाकर भर दिया जाता है। कई जगह बारीक धान की जगह पीआर किस्म का पोर्टल कर दिया जाता है, जिससे रिकॉर्ड में धान की आवक ज्यादा दिखाई जाती है।

उन्होंने बताया कि दूसरे प्रदेशों से सस्ते दामों पर धान खरीदी जाती है या फिर हरियाणा के किसानों से कम रेट पर धान ली जाती है। फिर उसे सरकारी रेट पर पोर्टल पर दिखाकर सरकार को बेच दिया जाता है। इसी कारण मंडियों में रिकॉर्ड तोड़ आवक दिखाई जा रही है।

करनाल की नई अनाज मंडी में मार्केट कमेटी के तीन अधिकारियों और कर्मचारियों ने मिलीभगत कर करीब एक लाख क्विंटल धान के करीब दो हजार से ज्यादा फर्जी गेट पास काट दिए। ये फर्जी गेट पास असली किसानों के नाम पर नहीं, बल्कि फर्जी खातों या अन्य लोगों के नाम से तैयार किए जा रहे थे, जिससे सरकारी खरीद रिकॉर्ड में हेरफेर की गई। खास बात ये है कि ये सभी फर्जी गेट पास मंडी के गेट से नहीं बल्कि मंडी के बाहर बैठकर काटे गए हैं। इसके लिए तीनों निलंबित अधिकारियों ने अपने ही यूजर आईडी ओर पासवर्ड का इस्तेमाल तो किया लेकिन इस्तेमाल के लिए डिवाइस दूसरी ले ली।

मामले की शिकायत होने पर गेट पास काटने वाली डिवाइसों की जांच की गई तो उनका आईपी एड्रेस अलग अलग लोकेशन का आया। इतना ही नहीं चर्चा में ये भी हैं कि इनकी यूजर आईडी और पासवर्ड एक साथ कई कई लोकेशन पर इस्तेमाल हो रहे थे। यानी इस मामले में इनके अलावा भी अन्य कई लोग शामिल रहे हैं। जिन्हें इन तीनों के यूजर आईडी और पासवर्ड की जानकारी थी। इस मामले की जांच अब मार्केट कमेटी के मुख्य अधिकारियों से लेकर तरावड़ी अनाज मंडी तक जाएगी। संशय है कि तरावड़ी अनाज मंडी के अधिकारी भी इस खेल में शामिल रहे हैं।

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रतन मान ने बताया कि इस फर्जीवाड़े में फर्जी पोर्टल का इस्तेमाल किया जाता है। गेटपास कटने के लिए फर्जी आईपी एड्रेस का उपयोग होता है ताकि सरकारी सिस्टम में पकड़े न जा सकें। सरकारी कंप्यूटरों के बजाय निजी सिस्टम से गेटपास काटे जाते हैं, जिससे पहचान मुश्किल हो जाती है और बाद में सब एडजस्ट कर दिया जाता है।

वह बताते हैं कि यह कोई छोटा खेल नहीं है, बल्कि संगठित नेटवर्क के जरिए किया जाता है। मंडियों में जब धान की बोली लगाई जाती है तो एच रजिस्टर में खरीददारों की जानकारी दर्ज होती है, लेकिन कर्मचारी इसे मौके पर भरने की बजाय मनमाने ढंग से भर देते हैं। यही वजह है कि कई बार अच्छी क्वालिटी की धान की बोली 2500 से 2600 रुपये प्रति क्विंटल तक चली जाती है, जबकि सरकारी खरीद 300 रुपये कम रेट पर होती है।

रतन मान ने खुलासा किया कि अब तो धान कागजों में ही पैदा हो रही है। यानी मंडियों में धान आई भी नहीं, लेकिन जे-फॉर्म काट दिए गए और पेमेंट भी कर दी गई। जो किसान इस गिरोह का हिस्सा हैं, उनके खातों में पैसा पहुंच गया। सूत्रों के अनुसार, इस फर्जीवाड़े में हर लेन-देन में हिस्सा तय होता है – 70 रुपये सेक्रेटरी के, 40-50 रुपये किसान के, जबकि आढ़ती को आढ़त बच जाती है क्योंकि असली धान आई ही नहीं।

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